Shivang Tiwari

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@shivang021

Shivang Tiwari shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shivang Tiwari's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

एक क़िस्मत है जो लाती है ख़रीदार मगर
एक तक़दीर है सौदा नहीं होने देती

Shivang Tiwari

मैं हिज्र का मारा हुआ हूँ इसलिए
मुझको दुआएँ दे दवाई रहने दे

Shivang Tiwari

ज़िंदगी लौट कर आ गई है
इक जगह तू नज़र आ गई है

रात भर याद करना था तुमको
रात भी ता-सहर आ गई है

Shivang Tiwari

गर दिखाना है तो ता-उम्र दिखा ये जज़्बा
एक दिन का ये तिरा इश्क़-ए-वतन ठीक नहीं

Shivang Tiwari

वादी झरने बर्फ़ की बातें करता है वो
दिल ही में कश्मीर बसाए बैठा है

Shivang Tiwari

मै तेरी दुश्मनी को कुछ दिनों में भूल जाता हूँ
मगर वो दोस्ती मुझको अभी भी याद आती है

Shivang Tiwari

लहू से लिक्खी किताब होगी कहाँ सुना था
ये ज़िन्दगी भी अ़ज़ाब होगी कहाँ सुना था

ख़राब होगी यहाँ पे हालत सुना था मैंने
मग़र ये इतनी ख़राब होगी कहाँ सुना था

Shivang Tiwari

उलझे ख़्याल दे कर ये साल चल दिया है
दिल को मलाल दे कर ये साल चल दिया है

कब कैसे किस तरह क्यों कितना कहाँ गँवाया
कितने सवाल दे कर ये साल चल दिया है

Shivang Tiwari

मिरी अना की आबरू उछाल कर चला गया
ये साल फिर से वहशतों में डाल कर चला गया

Shivang Tiwari

बहुत कठिन है मगर फिर भी चल के देखूँगा
मैं एक बार तो घर से निकल के देखूँगा

तवील अर्से से मंज़िल नहीं मिली तो क्या
हदफ़ वही है मैं रस्ता बदल के देखूँगा

Shivang Tiwari

तलवार तेरे तीर या ख़ंजर के बराबर
वो आज अकेला ही था लश्कर के बराबर

Shivang Tiwari

तेरी चाहत के हम भी थोड़े से हक़दार बन जाएँ
यही हसरत है तेरी ओढ़नी के तार बन जाएँ

यक़ीं हमको नहीं होता कभी पहली मुहब्बत का
तमन्ना है तुम्हारे आख़िरी हम प्यार बन जाएँ

Shivang Tiwari

रात के बाद फिर रात आ जाती है
मेरा सूरज ज़मीं रोज़ खा जाती है

मैं छुपा ही नहीं पाता ज़ख़्मों को अब
मेरे होंठों पे अब टीस आ जाती है

Shivang Tiwari

जाने किस बात की वो लड़की सजा देती है
मेरे सारे लिखे अशआर मिटा देती है

मेरे तहरीर किए ख़त मिले भी तो कैसे
मेरे भेजे वो कबूतर तो उड़ा देती है

Shivang Tiwari

कितनी उम्मीद लेके आई है
मेरी बेटी मेरी कमाई है

बात निकलेगी तो बढ़ेगी ही
चुप ही रहने में अब भलाई है

Shivang Tiwari

अब मेरी भी ऐसी हो क़िस्मत ज़रूरी तो नहीं
हुस्न की मुझको मिले उल्फ़त ज़रूरी तो नहीं

गर जहन्नुम ही रही है ज़िन्दगी सारी मेरी
बाद मरने के मिले जन्नत ज़रूरी तो नहीं

Shivang Tiwari

अजब सा एक रिश्ता चाँद का अम्बर के तारों से
कि बाग़ों का मिलन हो जैसे सावन में बहारों से

जहाँ में हाँ ज़ुबाँ कोई मुहब्बत की नहीं होती
बयाँ जज़्बात हो जाते हैं आँखों के इशारों से

Shivang Tiwari

शर्तें सभी मंज़ूर हैं ऐ ज़िंदगी
लेकिन कभी तो मुस्कुराने दे मुझे

Shivang Tiwari

जो ख़ुद पे गुज़री वो क़िस्सा लिखा है
अभी तो दिल का इक हिस्सा लिखा है

Shivang Tiwari

बात करने की कोई तो वज़ह दे दो
दिल में अपने ही थोड़ी सी जगह दे दो

Shivang Tiwari

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