Husn Shayari
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Husn Shayari

    हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ
    दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं

    Parveen Shakir
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    हुस्न को भी कहाँ नसीब 'जिगर'
    वो जो इक शय मिरी निगाह में है

    Jigar Moradabadi
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    हर हक़ीक़त है एक हुस्न 'हफ़ीज़'
    और हर हुस्न इक हक़ीक़त है

    Hafeez Banarasi
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    इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया
    ख़ुद-ब-ख़ुद घबरा के क़दमों में ज़माना आ गया

    Asad Bhopali
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    दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती
    इतनी ख़ूबसूरत ये ज़िंदगी नहीं होती

    Hastimal Hasti
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    हुस्न बला का कातिल हो पर आखिर को बेचारा है
    इश्क़ तो वो कातिल जिसने अपनों को भी मारा है

    ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
    इसके छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी

    Jaun Elia
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    हुस्न को शर्मसार करना ही
    इश्क़ का इंतिक़ाम होता है

    Asrar Ul Haq Majaz
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    इश्क़ को पूछता नहीं कोई
    हुस्न का एहतिराम होता है

    Asrar Ul Haq Majaz
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    ख़ूबसूरत है सिर्फ़ बाहर से
    ये इमारत भी आदमी सी है

    Azhar Nawaz
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    इश्क़ क्या है ख़ूबसूरत सी कोई अफ़वाह बस
    वो भी मेरे और तुम्हारे दरमियाँ उड़ती हुई

    Nomaan Shauque
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    हुस्न बख़्शा जो ख़ुदा ने आप बख़्शें दीद अपनी
    आरज़ू–ए–चश्म पूरी हो मुकम्मल ईद अपनी

    Dhiraj Singh 'Tahammul'
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    अगर बेदाग़ होता चाँद तो अच्छा नहीं लगता
    मोहब्बत ख़ूबसूरत दाग़ है, बेदाग़ से दिल पर

    Umesh Maurya
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    तुम्हारे साथ था तो मैं गम-ए-उल्फ़त में उलझा था
    तुम्हें छोड़ा तो ये जाना कि दुनिया ख़ूबसूरत है

    Nirbhay Nishchhal
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    बादलों में से छनता हुआ नूर देख
    ऐसी रौशन जबीं है मेरे यार की

    Afzal Ali Afzal
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    मन के हारे हुए इंसान को हुस्न-ए-शय से
    कोई मतलब नहीं कोई भी सरोकार नहीं

    shaan manral
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    तुम्हें आइनों की ज़रूरत नहीं है
    कि तुमसे कोई ख़ूबसूरत नहीं है

    Santosh S Singh
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    हमारा दिल फक़त दिल ही नहीं सोहिल
    ग़ज़ल का ख़ूबसूरत कारख़ाना है

    Sohil Barelvi
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    न पूछो हुस्न की तारीफ़ हम से
    मोहब्बत जिस से हो बस वो हसीं है

    Adil Farooqui
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    बला की ख़ूबसूरत वो उसे ही देख जीता हूँ
    मुझे उसकी ज़रूरत है, न मैं उसका चहीता हूँ

    कभी उसको परेशानी मिरे सिगरेट से होती थी
    उसे बोलो अभी कोई कि मैं दारू भी पीता हूँ

    Deepankar
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    तुम्हारे साथ इतना ख़ूबसूरत वक़्त गुज़रा है
    तुम्हारे बाद हाथों में घड़ी अच्छी नहीं लगती

    Madhyam Saxena
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