Asrar Ul Haq Majaz

Asrar Ul Haq Majaz

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Asrar Ul Haq Majaz shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Asrar Ul Haq Majaz's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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छुप गए वो साज़-ए-हस्ती छेड़ कर
अब तो बस आवाज़ ही आवाज़ है

Asrar Ul Haq Majaz

कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थी
कुछ मुझे भी ख़राब होना था

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मिरी बर्बादियों का हम-नशीनो
तुम्हें क्या ख़ुद मुझे भी ग़म नहीं है

Asrar Ul Haq Majaz
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तुमने तो हुक्म-ए-तर्क-ए-तमन्ना सुना दिया
किस दिल से आह तर्क-ए-तमन्ना करे कोई

Asrar Ul Haq Majaz

ये आना कोई आना है कि बस रस्मन चले आए
ये मिलना ख़ाक मिलना है कि दिल से दिल नहीं मिलता

Asrar Ul Haq Majaz
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मुझ को ये आरज़ू वो उठाएँ नक़ाब ख़ुद
उन को ये इंतिज़ार तक़ाज़ा करे कोई

Asrar Ul Haq Majaz
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नहीं हर चंद किसी गुम-शुदा जन्नत की तलाश
इक न इक ख़ुल्द-ए-तरब-नाक का अरमाँ है ज़रूर

बज़्म-ए-दोशंबा की हसरत तो नहीं है मुझ को
मेरी नज़रों में कोई और शबिस्ताँ है ज़रूर

Asrar Ul Haq Majaz
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ये क़त्ल-ए-आम और बे-इज़्न क़त्ल-ए-आम क्या कहिए
ये बिस्मिल कैसे बिस्मिल हैं जिन्हें क़ातिल नहीं मिलता

वहाँ कितनों को तख़्त ओ ताज का अरमाँ है क्या कहिए
जहाँ साइल को अक्सर कासा-ए-साइल नहीं मिलता

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हर चंद कि हैं अदबार में हम
कहते हैं खुले बाज़ार में हम

हैं सब से बड़े संसार में हम
मज़दूर हैं हम मज़दूर हैं हम

Asrar Ul Haq Majaz
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शराब खींची है सब ने ग़रीब के ख़ूँ से
तू अब अमीर के ख़ूँ से शराब पैदा कर

तू इंक़लाब की आमद का इंतिज़ार न कर
जो हो सके तो अभी इंक़लाब पैदा कर

Asrar Ul Haq Majaz
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सदा दी तू ने क्या जाने कहाँ से
मगर मैं जानिब-ए-दिल देखता हूँ

Asrar Ul Haq Majaz
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फिर किसी के सामने चश्म-ए-तमन्ना झुक गई
शौक़ की शोख़ी में रंग-ए-एहतराम आ ही गया

Asrar Ul Haq Majaz
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मिरी वफ़ा का तिरा लुत्फ़ भी जवाब नहीं
मिरे शबाब की क़ीमत तिरा शबाब नहीं

Asrar Ul Haq Majaz
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सच तो ये है 'मजाज़' की दुनिया
हुस्न और इश्क़ के सिवा क्या है

Asrar Ul Haq Majaz
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इश्क़ को पूछता नहीं कोई
हुस्न का एहतिराम होता है

Asrar Ul Haq Majaz
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हुस्न ने शौक़ के हंगामे तो देखे थे बहुत
इश्क़ के दावा-ए-तक़दीस से डर जाना था

Asrar Ul Haq Majaz
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शौक़ के हाथों ऐ दिल-ए-मुज़्तर क्या होना है क्या होगा
इश्क़ तो रुस्वा हो ही चुका है हुस्न भी क्या रुस्वा होगा

Asrar Ul Haq Majaz
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हुस्न को शर्मसार करना ही
इश्क़ का इंतिक़ाम होता है

Asrar Ul Haq Majaz
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इश्क़ का ज़ौक़-ए-नज़ारा मुफ़्त में बदनाम है
हुस्न ख़ुद बे-ताब है जल्वा दिखाने के लिए

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बख़्शी हैं हम को इश्क़ ने वो जुरअतें 'मजाज़'
डरते नहीं सियासत-ए-अहल-ए-जहाँ से हम

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