नाम अब उस का बताने से रहे
हम ये पर्दा अब उठाने से रहे
एक मुद्दत तक तलाशा है उसे
कर्ज़ कोई हम चुकाने से रहे
आके ले ले कोई चाहे इम्तिहान
हम कोई पर्चा दिखाने से रहे
हमनें सब से ही रखा है फ़ासला
तुम हमें अब आज़माने से रहे
हम निकल आए हैं उस दर से भी अब
हम वफ़ा तुम से निभाने से रहे
— Ankur Mishra















