हम ने ख़ुद से भी उल्फ़त नहीं की
बा'द उस के मोहब्बत नहीं की
मर गया मुझ
में मैं पर किसी ने
उस से कोई शिकायत नहीं की
छोड़ दूँ कैसे मैं आदत उस की
जिस की हमनें हिफ़ाज़त नहीं की
ख़ुद न दुश्मन हो जाएँ ख़ुदी के
इस लिए बस बग़ावत नहीं की
मैं हूँ वाक़िफ़ ज़माने से अंकुर
इस लिए कोई चाहत नहीं की
— Ankur Mishra















