रुका तू मुद्दतों के बा'द मुस्कुरा के पास है
मुझे लगा कि आज तीरगी में भी उजास है
नशे में काँपते दिखे तेरे ये हाथ तो लगा
मकान है बुलन्द और काँपती असास है
तू साथ गर ख़ुशी ख़ुशी न चल सके तो लौट जा
मुझे तेरी ख़ुशी तेरा सुकून सब से ख़ास है
यूँ तैश में जो फूल तोड़ के गया है दूर तू
तभी से मौसम-ए-बहार बाग़ में उदास है
जो ये हवा गिरा रही है टहनियों से पत्तियाँ
बयार बिन तेरे दुखी है ख़ुश्क बद-हवा से है
तेरे दिए हुए जो फूल ख़्वाब में बिखर गए
खुली जो आँख पास तू नहीं तो सिर्फ़ यास है
तमाम रात वहम में ही जाग के गुज़ार दी
मेरे तू साथ है नहीं मगर तू आस पास है
— Meenakshi Masoom















