मजबूरी लाचारी लिख

हाँ रूदाद हमारी लिख

ग़ैरों को इल्ज़ाम न दे
अपनों की अय्यारी लिख

सोच जो हल्की है तो क्या
ग़ज़लें भारी भारी लिख

ऐब न गिनवा औरों के
अपनी कार-गुज़ारीलिख

पहले झूटे वादे कर
फिर अपनी लाचारी लिख

चाहे हक़ीक़त कुछ भी हो
अपना पलड़ा भारी लिख

उजड़े घर के आँगन में
हरी-भरी फुलवारी लिख

हर मंसब हर ओहदे पर
अपनी दावेदारी लिख

'चाँद' की ख़सलत में यारब
कुछ तो दुनियादारी लिख

— Mahendra Pratap Chand

Shohrat Shayari

Shers of shohrat.

All Shohrat Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling