वादी वादी गाने वाला आएगा

फिर कब वो मुफ़्लिस-शहज़ादा आएगा

क्यूँ मैं कहूँ तू मेरा दोस्त भी लगता है
सब के लबों पर कल ये क़िस्सा आएगा

बंजर धरती तारों से मत पानी माँग
फिर कोई बादल आवारा आएगा

ख़्वाबों में भी हम को ये उम्मीद न थी
आँख खुले पर ध्यान न तेरा आएगा

आईना आईना इतराने वाला
मेरे आगे बिखरा बिखरा आएगा

— M Kothiyavi Rahi

More by M Kothiyavi Rahi

Other ghazal from the same pen

See all from M Kothiyavi Rahi →

Lab Shayari

Shers of lab.

All Lab Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling