चाँद सूरज की चमक और सितारा देखो
बाम से उतरो उतरते ही दुबारा देखो
पहले देखो मिरी आँखों में मुहब्बत अपनी
कुछ न दिख पाए तो दरिया का किनारा देखो
जो तरफ़दार थे अख़लाक़ के उन सबके सिवा
कैसे कैसों को दिया उस ने सहारा देखो
माँगता कौन बग़ावत की पज़ीराई पर
कैसे करते हैं यहाँ लोग गुज़ारा देखो
हो ख़सारा तो बताते हैं मुनाफ़ा ये लोग
और मुनाफ़े से ये कहते हैं ख़सारा देखो
— Lalit Pandey















