मेरे अश्कों की क़ीमत दे सको तो लौट आना तुम

तड़पते दिल को राहत दे सको तो लौट आना तुम

मुझे भी बे-हयाई की, ज़रा सी बेवफ़ाई की
अगर थोड़ी सहूलत दे सको तो लौट आना तुम

तअल्लुक़ तोड़ जाने की, सफ़र में छोड़ जाने की
जो मुझ को भी इजाज़त दे सको तो लौट आना तुम

भरोसा तोड़ने वाले मुझे इक बार जो फिर से
यक़ीं करने की हिम्मत दे सको तो लौट आना तुम

किसी के साथ होकर के किसी के साथ होने की
मुझे भी ये शराफ़त दे सको तो लौट आना तुम

तमन्ना जिस्म की होती तो फिर बाज़ार ज़िंदा है
मुहब्बत! हाँ मुहब्बत दे सको तो लौट आना तुम

— Kumar Vikas

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