रंग लाया न कभी बर्गे-हिना मेरे बा'द

उस हथेली पे कोई गुल न खिला मेरे बा'द

उस ने यूँ ही नहीं छोड़ी है जफ़ा मेरे बा'द
तीर ही कोई न तरकश में बचा मेरे बा'द

आइना दिल का मेरे होते हुए कर लो साफ़
यूँ भी उड़ा जाएगी ये गर्दे-अना मेरे बा'द

मैं ने जब छोड़ दी दुनिया तो अकेला ही रहा
कौन देता मेरे होने का पता मेरे बा'द

कूचए-यार की बातें मैं किया करता था
अब अगर आती तो क्या पाती सबा मेरे बा'द

जिस्म होता तो नज़र आता भी मैं भी, वो भी
साथ रहता है मेरे मेरा ख़ुदा मेरे बा'द

परवरिश जिस की जहाँ होती है रहता है वहीं
किस के घर जाएगा सैलाबे-बला मेरे बा'द

नूर बस इतना ही महसूस हुआ ये जाना
फ़र्क होने का न होने का मिटा मेरे बा'द

— Krishna Bihari Noor

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