नताएज जब सर-ए-महशर मिलेंगे
मोहब्बत के अलग नंबर मिलेंगे
कोई चालाक पानी पी गया है
घड़े में अब फ़क़त कंकर मिलेंगे
ये दीवारें किसी की मुंतज़िर हैं
यहाँ हर सम्त कैलन्डर मिलेंगे
हवा की पैरवी करनी पड़ेगी
यूँही थोड़ी शजर झुक कर मिलेंगे
तुम्हारी मेज़बानी के बहाने
कोई दिन हम भी अपने घर मिलेंगे
— Khurram Afaq















