अब ऐसे ज़ाविए पर लौ रखी जाने लगी है
चराग़ों के तले भी रौशनी जाने लगी है
असासो के नए हक़दार पैदा हो रहे हैं
वसीयत इस लिए जल्दी लिखी जाने लगी है
नया पहलू सलीक़े से बयाँ करना पड़ेगा
कहानी अब तवज्जोह से सुनी जाने लगी है
सवाली इस लिए चुप चाप रुख़्सत हो रहे हैं
तेरी सूरत बा-आसानी पढ़ी जाने लगी है
— Khurram Afaq















