नया इक मोड़ देखो आ गया मेरी कहानी में
दिवाना रोज़ मिल कर भी नहीं मिलता दिवानी में
भुला सकती नहीं अब तो मुझे तुम जान कर जाना
ये अपनी जान दी तुझ को मुहब्बत की निशानी में
नहीं होगी जुदा सच्ची मुहब्बत से मुहब्बत अब
मरेगा अब नहीं किरदार भी मेरी कहानी में
उसी के देखने से बस दिया रौशन हुआ होगा
उसी ने देखना छू कर लगा दी आग पानी में
— Kamlesh Goyal















