काम यही है शाम सवेरे
तेरी गली के सौ सौ फेरे
सामने वो हैं ज़ुल्फ़ बिखेरे
कितने हसीं हैं आज अंधेरे
हम तो हैं तेरे पूजने वाले
पाँव न पड़वा तेरे मेरे
दिल को चुराया ख़ैर चुराया
आँख चुरा कर जा न लुटेरे
— Kaif Bhopali
तेरी गली के सौ सौ फेरे
सामने वो हैं ज़ुल्फ़ बिखेरे
कितने हसीं हैं आज अंधेरे
हम तो हैं तेरे पूजने वाले
पाँव न पड़वा तेरे मेरे
दिल को चुराया ख़ैर चुराया
आँख चुरा कर जा न लुटेरे
Other ghazal from the same pen
Shers of nigaah.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling