अब इस भ्रम में हर एक रात काटनी है मुझे
के आने वाली तेरे साथ काटनी हैं मुझे
तुझे दिलाना है एहसास अपने इस दुख का
तू कुछ तो बोल तेरी बात काटनी है मुझे
मुझे तुलू-ए-सहर की तसल्लीया मत दे
अभी तो ये शब-ए-जुलमात काटनी हैं मुझे
— Ismail Raaz
के आने वाली तेरे साथ काटनी हैं मुझे
तुझे दिलाना है एहसास अपने इस दुख का
तू कुछ तो बोल तेरी बात काटनी है मुझे
मुझे तुलू-ए-सहर की तसल्लीया मत दे
अभी तो ये शब-ए-जुलमात काटनी हैं मुझे
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