दवा से ठीक हो जाऊँगा लेकिन होना ही क्यूँँ है

दुआ से ठीक हो जाऊँगा लेकिन होना ही क्यूँ है

मुझे मालूम है कुछ लोग साज़िश रचते होंगे पर
जफ़ा से ठीक हो जाऊँगा लेकिन होना ही क्यूँ है

मरीज़-ए-इश्क़ हूँ मैं मुद्दतों से एक उस की सिर्फ़
अदास ठीक हो जाऊँगा लेकिन होना ही क्यूँ है

ज़ियादा वक़्त क्यूँ बर्बाद करते हो यहाँ मुझ पर
हवा से ठीक हो जाऊँगा लेकिन होना ही क्यूँ है

तुम्हारी ये मुहब्बत देखके मुझ को तो लगता है
वफ़ा से ठीक हो जाऊँगा लेकिन होना ही क्यूँ है

— Anuraag Pathak 'anuj'

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