जब एक शख़्स अपना ठिकाना बदल गया

फिर उस के साथ सारा ज़माना बदल गया

बदली निगाह-ए-नाज़ किसी ख़ुश-जमाल ने
बदला रुख़-ए-कमान निशाना बदल गया

बारिश में तेज़ धूप निकल आई चार-सू
मौसम था वो जो ख़ूब सुहाना बदल गया

वो शख़्स बे-सबात का मतलब बताएगा
वो शख़्स जिस का दोस्त पुराना बदल गया

हिजरत के साथ साथ मईशत बदल गई
शजरे के साथ साथ घराना बदल गया

बे-चारी लड़कियों का भी कैसा नसीब है
निस्बत बदल गई तो ठिकाना बदल गया

— Iftikhar Haidar

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