जिनपे अच्छी ख़ासी दौलत होती है

लड़की को उन से मुहब्बत होती है

सिर्फ़ सूरज ही बता सकता है ये
जुगनुओं में कितनी हिम्मत होती है

मेरे कमरे में तो अब आठों पहर
बस उदासी की सदारत होती है

जिस को तुम चाहो वो चाहे तुम को ही
सौ में इक की ऐसी क़िस्मत होती है

उस के दो दो तिल हैं वो भी होंठ पर
कुछ पे ही क़ुदरत की नेमत होती है

— Dhirendra Pratap Singh

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