तेरी मुश्किल न बढ़ाऊँगा चला जाऊँगा

अश्क आँखों में छुपाऊँगा चला जाऊँगा

अपनी दहलीज़ पे कुछ देर पड़ा रहने दे
जैसे ही होश में आऊँगा चला जाऊँगा

ख़्वाब लेने कोई आए कि न आए कोई
मैं तो आवाज़ लगाऊँगा चला जाऊँगा

चंद यादें मुझे बच्चों की तरह प्यारी हैं
उन को सीने से लगाऊँगा चला जाऊँगा

मुद्दतों बा'द मैं आया हूँ पुराने घर में
ख़ुद को जी भर के रुलाऊँगा चला जाऊँगा

इस जज़ीरे में ज़ियादा नहीं रहना अब तो
आजकल नाव बनाऊँगा चला जाऊँगा

मौसम-ए-गुल की तरह लौट के आऊँगा 'हसन'
हर तरफ़ फूल खिलाऊँगा चला जाऊँगा

— Hasan Abbasi

More by Hasan Abbasi

Other ghazal from the same pen

See all from Hasan Abbasi →

Environment Shayari collection

Shers of environment shayari collection.

All Environment Shayari collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling