हमें इस मिट्टी से कुछ यूँँ मुहब्बत हैयहीं पे निकले दम दिल की ये हसरत हैहमें क्यूँ चाह उस दुनिया की हो मौलाहमारी तो इसी मिट्टी में जन्नत है— Harsh saxena