ज़िंदगी को न बना लें वो सज़ा मेरे बा'द
हौसला देना उन्हें मेरे ख़ुदा मेरे बा'द
कौन घूँघट को उठाएगा सितमगर कह के
और फिर किस से करेंगे वो हया मेरे बा'द
फिर मोहब्बत की ज़माने में न पुर्सिश होगी
रोएगी सिसकियाँ ले ले के वफ़ा मेरे बा'द
हाथ उठते हुए उन के न कोई देखेगा
किस के आने की करेंगे वो दुआ मेरे बा'द
किस क़दर ग़म है उन्हें मुझ से बिछड़ जाने का
हो गए वो भी ज़माने से जुदा मेरे बा'द
वो जो कहता था कि 'नासिर' के लिए जीता हूँ
उस का क्या जानिए क्या हाल हुआ मेरे बा'द
— Hakeem Nasir















