तब्सिरा क्यूँ कर रहे हो बारहा अज्दाद पर

फ़ैसला होगा तुम्हारा आज की बुनियाद पर

बात तेरी मिल-मिला कर ठीक है नक़्क़ाद पर
शे'र अच्छा या बुरा है मुनहसिर है दाद पर

सब हिफ़ाज़त कर रहें हैं मुस्तक़िल दीवार की
जब कि हमला हो रहा है मुस्तक़िल बुनियाद पर

कैसे निकलोगे भला अपने गुनह के जाल से
तुम ने तो इल्ज़ाम सारा रख दिया सय्याद पर

दर-ब-दर फिरना पड़ेगा आशिक़ों को उम्र भर
ज़ुल्म सहना लाज़मी है वारिस-ए-फ़र्हाद पर

माँ के पैरों के तले जन्नत की ने'मत है मगर
बाप का साया भी 'अहया' चाहिए औलाद पर

— Ehya Bhojpuri

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Gunaah Shayari

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