जब हो गया कमाल तो सिगरेट जला लिया
या फिर हुआ मलाल तो सिगरेट जला लिया
ख़ुद पर किसी को हँसने का मौक़ा नहीं दिया
पूछा किसी ने हाल तो सिगरेट जला लिया
सूखे गले से लफ़्ज़ को लाना था ज़ेहन तक
जब आ गया ख़याल तो सिगरेट जला लिया
ग़ुस्से में ख़ूँ के घूँट तो पीता रहा मगर
आँखें हुईं जो लाल तो सिगरेट जला लिया
अच्छी नहीं है शय मगर 'अहया' मैं क्या करूँ
करना है शुक्र-ए-हाल तो सिगरेट जला लिया
— Ehya Bhojpuri















