काजल उदास है तो हैं बे-कल सी चूड़ियाँ

तुम को बुला रही हैं ये चंचल सी चूड़ियाँ

सावन की मुझ को प्यास है प्यासी हूँ मिस्ल रेत
तुझ पर बरस रही हैं ये बादल सी चूड़ियाँ

करती हैं ख़ूब शोर न सोने ये मुझ को दें
दीवानी हो गई हैं ये पागल सी चूड़ियाँ

देखो खनक रही हैं ये ख़ामोशियों में भी
आँखों में सज रही हैं ये जल-थल सी चूड़ियाँ

पल पल ये छू रही हैं मिरा जिस्म और बदन
करती हैं मुझ को तंग ये सांवल सी चूड़ियाँ

ऐ शाह-ए-दिल सुहाग निशानी हमारी हैं
प्यारी हैं मुझ को जान से पर्पल सी चूड़ियाँ

ख़ुश्बू मिरे बदन की चुराती हैं रोज़-ओ-शब
देखो 'दुआ' कमाल हैं संदल सी चूड़ियाँ

— Dua Ali

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