राज़ जो भी था नज़र में आ गया

आप का चेहरा नज़र में आ गया

वक़्त आया था बुरा सो देख लो
आप का लहजा नज़र में आ गया

डूबने वाली थी कश्ती इश्क़ की
और इक तिनका नज़र में आ गया

पाक था मैं और दामन था सफ़ेद
ख़ून का धब्बा नज़र में आ गया

काम भी सारा किया और चुप रहे
बोलने वाला नज़र में आ गया

कल पिताजी हँस रहे थे और तभी
पैर का छाला नज़र में आ गया

— Divy Kamaldhwaj

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