देख रहा है किस का चेहरा, आगे बढ़
मिल जाएगा तुझ को रस्ता, आगे बढ़
बैठे-बैठे केवल उतना मिलता है
जितना छोड़े आगे वाला, आगे बढ़
इस रण में जय और पराजय मेरी है
तू गाण्डीव उठा, कर हमला, आगे बढ़
मासूमों की भूख की क़ीमत क्या होगी
दो गाली, रुपया, और ताना, आगे बढ़
भीगी आँखें, टूटा दिल और चिल्लाना
सदियों का ये खेल पुराना, आगे बढ़
तूफ़ाँ, बिजली और बवंडर तो होंगे
हिम्मत से बस नाव चलाना, आगे बढ़
— Divy Kamaldhwaj















