तसल्ली कर के ही आवाज़ देना
जिसे भी आख़री आवाज़ देना
इसी लहजे की फरमाइश है मेरी
मुझे बिल्कुल यही आवाज़ देना
तुम्हारी सम्त है सारी तवज़्ज़ोह
अ
गर चाहो कभी आवाज़ देना
मुकर जाते हो फिर तुम पूछने पर
बुलाना हो तभी आवाज़ देना
ये आवाज़ों का फीकापन तो जाए
ज़रा रस घोलती आवाज़ देना
हमारा हक़ भी है तुम पर यक़ीनन
हमें भी ज़िन्दगी आवाज़ देना
— Danish Naqvi















