महाज़-ए-जंग से पहले कहीं पड़ाव बनाओ

नदी पे बाँध बनाने से पहले नाव बनाओ

ये रात सिर्फ़ अँधेरी नहीं है सर्द भी है
दिया बना लिया शाबाश अब अलाव बनाओ

बनाना जानते हो तुम तो सब के दिल में जगह
हमारे दिल में बना कर दिखाओ आओ बनाओ

किताब फाड़ के भी नाव ही बनानी है
तो सीधे पेड़ को काटो सुखाओ नाव बनाओ

ये संग-ए-मरमरी नाख़ुन ये कत्थई पॉलिश
कि कोई देखे तो कह दे हमारे घाव बनाओ

बनाओ ताजमहल के बजाय ताश महल
तमाम उम्र मुहब्बत करो गिराओ बनाओ

तुम्हारी अच्छी बनेगी हमारे साथ कि तुम
बहाने अच्छे बना लेते हो बनाओ बनाओ

— Charagh Sharma

More by Charagh Sharma

Other ghazal from the same pen

See all from Charagh Sharma →

Taj Mahal Shayari

Shers of taj mahal.

All Taj Mahal Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling