कोई ख़त वत नहीं फाड़ा कोई तोहफ़ा नहीं तोड़ा
कि वो देखे तो ख़ुद सोचे कि दिल तोड़ा नहीं तोड़ा
यहाँ मैं ने गले में बाँध ली रस्सी और इक वो है
कि अब तक सिर्फ़ दस्तक दी है दरवाज़ा नहीं तोड़ा
भरोसा था भरोसा तोड़ देगा वो सो उस ने भी
भरोसा तोड़ के वो जो भरोसा था नहीं तोड़ा
बनाना आ गया जब काँच की किरचों से कोहेनूर
ग़ज़ल कहने लगे ग़ुस्से में गुलदस्ता नहीं तोड़ा
— Charagh Sharma















