किसे मालूम है कैसे उजाला कर रहे हैं हम
कि शब भर जाग के जुगनू इकट्ठा कर रहे हैं हम
बहुत हिम्मत जुटा के फिर भरोसा कर तो लें लेकिन
हमें डर है वही ग़लती दुबारा कर रहे हैं हम
हमें मालूम है उस की तवज्जोह कैसे मिलनी है
सो बस मसरूफ़ होने का दिखावा कर रहे हैं हम
अगर कोशिश करे कोई दरारें भर भी सकती हैं
मगर तुम से न होगा कुछ लिहाज़ा कर रहे हैं हम
ढलेगी रात कब तक ये नहीं परवाह है हम को
है जब तक रौशनी ख़ुद में उजाला कर रहे हैं हम
— Bhawana Srivastava















