कहीं अबीर की ख़ुश्बू कहीं गुलाल का रंगकहीं पे शर्म से सिमटे हुए जमाल का रंगचले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवेबरसना चाहिए होली के दिन विसाल का रंग— Azhar Iqbal