
मुझे चाह थी किसी और की, प मुझे मिला कोई और है
मेरी ज़िन्दगी का है और सच, मेरे ख़्वाब सा कोई और है
तू क़रीब था मेरे जिस्म के, बड़ा दूर था मेरी रूह से
तू मेरे लिए मेरे हमनशीं कोई और था कोई और है
— Avtar Singh Jasser
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