मानता मैं नहीं हूँ कथन आप का
आप राधा नहीं जो किसन आप का
साफ़ कह दो बहुत है समय आज का
सच बयाँ कर रहा है रहन आप का
नींद बाधित करो अब जगाओ मुझे
अब नहीं देखा जाता सपन आप का
चोट इतने दिए पास रह कर मुझे
इस लिए कर रहा हूँ दहन आप का
वे सभी चाँद तारे नहीं चाहिए
कब मुझे चाहिए था गगन आप का
— Aman Vishwakarma 'Avish'















