यार तुम भी कमाल करते हो

फिर बुरा मेरा हाल करते हो

वक़्त पर ख़ुद कभी नहीं मिलते
और मुझ से मलाल करते हो

इक तो ग़लती मिरी नहीं होती
तुम मुझी से सवाल करते हो

कोई खिलता गुलाब लगते हो
जब भी गालों को लाल करते हो

ये बताओ ये क़ुदरती है या
रोज़ इन पर गुलाल करते हो

हुस्न भी ठीक है मगर 'आतिफ'
बातें तुम बे-मिसाल करते हो

— Atif khan

More by Atif khan

Other ghazal from the same pen

See all from Atif khan →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling