बोल! अरी ओ धरती बोल
राज सिंघासन डाँवाडोल
बादल बिजली रैन अँधयारी
दुख की मारी प्रजा सारी
बूढ़े बच्चे सब दुखिया हैं
दुखिया नर हैं दुखिया नारी
बस्ती बस्ती लूट मची है
सब बनिए हैं सब ब्योपारी
बोल! अरी ओ धरती बोल
राज सिंघासन डाँवाडोल
— Asrar Ul Haq Majaz
राज सिंघासन डाँवाडोल
बादल बिजली रैन अँधयारी
दुख की मारी प्रजा सारी
बूढ़े बच्चे सब दुखिया हैं
दुखिया नर हैं दुखिया नारी
बस्ती बस्ती लूट मची है
सब बनिए हैं सब ब्योपारी
बोल! अरी ओ धरती बोल
राज सिंघासन डाँवाडोल
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