जाने कितनी कहानियाँ समेटे रहा होगावो जो शख़्स हाल-ए-दिल बायाँ करता भी नहींदर्द कितनी होगी, बेचैनी कितनी होगीवो ज़बान जो किसी से कुछ कहता ही नहीं— Ashish Anand