बात मैं सरसरी नहीं करता
और वज़ाहत कभी नहीं करता
एक ही बात मुझ
में अच्छी है
और मैं बस वही नहीं करता
मुझ को कैसे मिले भला फ़ुर्सत
मैं कोई काम ही नहीं करता
आप ही लोग मार देते हैं
कोई भी ख़ुद-कुशी नहीं करता
एक जुगनू है तेरी यादों का
जो कभी रौशनी नहीं करता
— Ammar Iqbal















