आलम ए रुस्वाई है और कुछ नहीं है

रह गई तन्हाई है और कुछ नहीं है

जो मुसलसल साथ मेरा दे रही है
बस मेरी परछाई है और कुछ नहीं है

तुम पहाड़ों सा उसे हो क्यूँ बनाते
बात जो इक राई है और कुछ नहीं है

आप की गुस्ताख़ियों पे चुप खड़े हैं
ये मेरी अच्छाई है और कुछ नहीं है

आए ख़ाली हाथ थे जाना है ख़ाली
इक ये ही सच्चाई है और कुछ नहीं है

— Amit Gautam

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