दुआ है और न कोई बद-दुआ' है
ये दुनिया तो महज़ इक हादिसा है
तुम्हारे सामने जो आइना है
यक़ीं जानो वही तो आश्ना है
जो कहना था वो हम ने कह दिया है
बताएँ आप का क्या फ़ैसला है
अजब दुनिया है इंसानों की दुनिया
जहाँ इंसानियत ही गुम-शुदा है
तसव्वुर बारहा पहुँचा वहीं पर
ज़मीर अक्सर जहाँ पर रोकता है
यही सच्चाई है हर एक सच की
यही लगता है बस इक ज़ाविया है
ये दुनिया जान-ए-जाँ तेरी न मेरी
मकीं सब हैं मगर मालिक ख़ुदा है
— Ameeta Parsuram Meeta















