चाँद सा चेहरा नूर की चितवन माशा-अल्लाह माशा-अल्लाह

तुर्फ़ा निकाला आप ने जोबन माशा-अल्लाह माशा-अल्लाह

गुल रुख़-ए-नाज़ुक ज़ुल्फ़ है सुम्बुल आँख है नर्गिस सेब-ए-ज़नख़दाँ
हुस्न से तुम हो ग़ैरत-ए-गुलशन माशा-अल्लाह माशा-अल्लाह

साक़ी-ए-बज़्म-ए-रोज़-ए-अज़ल ने बादा-ए-हुस्न भरा है इस में
आँखें हैं साग़र शीशा है गर्दन माशा-अल्लाह माशा-अल्लाह

क़हर ग़ज़ब ज़ाहिर की रुकावट आफ़त-ए-जाँ दर-पर्दा लगावट
चाह की तेवर प्यार की चितवन माशा-अल्लाह माशा-अल्लाह

ग़म्ज़ा उचक्का इश्वा है डाकू क़हर अदाएँ सेहर हैं बातें
चोर निगाहें नाज़ है रहज़न माशा-अल्लाह माशा-अल्लाह

नूर का तन है नूर के कपड़े उस पर क्या ज़ेवर की चमक है
छल्ले कंगन इक्के जोशन माशा-अल्लाह माशा-अल्लाह

जम्अ''' किया ज़िद्दैन को तुम ने सख़्ती ऐसी नर्मी ऐसी
मोम बदन है दिल है आहन माशा-अल्लाह माशा-अल्लाह

वाह 'अमीर' ऐसा हो कहना शे'र हैं या मा'शूक़ का गहना
साफ़ है बंदिश मज़मूँ रौशन माशा-अल्लाह माशा-अल्लाह

— Ameer Minai

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