दिल जिन को ढूँढ़ता है न-जाने कहाँ गए

ख़्वाब-ओ-ख़याल से वो ज़माने कहाँ गए

मानूस बाम-ओ-दर से नज़र पूछती रही
उन में बसे वो लोग पुराने कहाँ गए

उस सर
ज़मीं से थी जो मोहब्बत वो क्या हुई
बच्चों के लब पे थे जो तराने कहाँ गए

अपनी ख़ता पे सर को झुकाया है आज क्यूँ
अज़बर जो आप को थे बहाने कहाँ गए

पत्थर समाअतों से ज़बाँ गुंग हो गई
हम भी गए तो हाल सुनाने कहाँ गए

बे-महरी-ए-हयात तुझे कुछ ख़बर भी है
देखे गए जो ख़्वाब सुहाने कहाँ गए

बचपन सहेलियाँ वो हमा-वक़्त की हँसी
'अंबर' वो ज़िंदगी के ख़ज़ाने कहाँ गए

— Ambreen Haseeb Ambar

More by Ambreen Haseeb Ambar

Other ghazal from the same pen

See all from Ambreen Haseeb Ambar →

Bachpan Shayari

Shers of bachpan.

All Bachpan Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling