Ambar
Ambar
Ghazal

छुपाये भी नहीं छुपती महक जिस की वो तुम ही हो

ज़माने में अगर कोई हुई तुझ सी वो तुम ही हो

फ़लक से अलविदा ले के क़मर आया है धरती पे
नशीली सी क़यामत सी तिलिस्मी सी वो तुम ही हो

दिखा जो चाँद जाता दूर रोया आसमाँ भी था
सितारों ने भी माँगी थी दुआ जिस की वो तुम ही हो

तुम्हें देखा है हर लम्हा ख़ुशी से नाचते गाते
उदासी जिस के चहरे पे नहीं जचती वो तुम ही हो

इशारों में सही पर बात होनी चाहिए जिस से
न इक पल की सही जाए ज़रा दूरी वो तुम ही हो

अकेले जब कभी बैठा हूँ तेरी याद आने पर
लगाए आग ठंडक की जो शीतल सी वो तुम ही हो

— Ambar

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