उस सेे ये मत पूँछो,क्या करने की हिम्मत है

जिस
में सपनों को ज़िंदा करने की हिम्मत है

आँधी तूफ़ान बवंडर से लड़कर पाई है
मुझ
में माटी को दाना करने की हिम्मत है

अब तो अपनी प्यास बुझेगी बरसातों से ही
वरना दरिया को प्यासा करने की हिम्मत है

सरकार हमारी फसलों की कीमत क्या देगी
उस
में तो केवल कब्जा करने की हिम्मत है

सारी हिम्मत टूट गई,बच्चों से ये सुन कर
अब भूखे पेट गुज़ारा करने की हिम्मत है

फूँका घर, भूखे बच्चे, टूटी उम्मीदें, अब
मुझ
में, रस्सी को फंदा करने की हिम्मत है

— Aman G Mishra

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