मुझे अब दुआ की ज़रूरत नहीं है

तू है ना ख़ुदा की ज़रूरत नहीं है

ज़रूरत नहीं है तुझे यार मेरी
तुझे बद-दु'आ की ज़रूरत नहीं है

वो छू कर गया है बदन यार ऐसे
मुझे अब दवा की ज़रूरत नहीं है

ज़रूरत सभी को बहुत की यहाँ पर
किसी को ज़रा की ज़रूरत नहीं है

वो देकर गया है मुआ'फ़ी मुझे यूँ
किसी भी सज़ा की ज़रूरत नहीं है

समझ ना ज़रा मेरी हालत समझ ना
बला दे सदा की ज़रूरत नहीं है

ज़रूरत अमन क्या किसीको हो तेरी
किसीको ख़ला की ज़रूरत नहीं है

— Aman Mishra 'Anant'

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Badan Shayari

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