एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती हैज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती हैजिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वोऔर जिसे मारना हो यार बना लेती है— Ali Zaryoun