वो ही अंदाज़-ए-दिलबरी है अभी
उस की बातों में दिलकशी है अभी
कश्ती-ए-दिल बहक न जाए कहीं
मौज-दर-मौज गुम रही है अभी
किसी तूफ़ान का इशारा है
ये जो सफ़्फ़ाक ख़ामुशी है अभी
राख से अब भी उठ रहा है धुआँ
याद-ए-माज़ी सुलग रही है अभी
इश्क़ में सब तो हद से पार हुए
पर हमें एहतियात सी है अभी
अहद-ओ-पैमाँ करेंगे फ़ुर्सत से
कोई जल्दी नहीं पड़ी है अभी
क्या मोहब्बत ही की अलामत है
उस की पलकों में जो नमी है अभी
— Aleena Itrat















