AKASH
AKASH
Ghazal

भरता हूँ सिगरेट ख़ाली जाम करता हूँ

रातो दिन बस इक यही तो काम करता हूँ

इक तरफ़ होती ख़ुशी है उस के जाने से
इक तरफ़ जाने से मैं कोहराम करता हूँ

दुश्मनों में आती है गिनती मेरी उस के
पर मैं उस के दोस्तों का काम करता हूँ

नाम पर उस के हो जाती जंग है मेरी
उस को लगता है उसे बदनाम करता हूँ

ग़ज़लें मेरी हैं किसी की यादें मेरे दोस्त
ग़ैरों के दम पर मैं अपना नाम करता हूँ

— AKASH

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