तुम से आता नहीं जुदा होना
तुम मिरी आख़िरी सज़ा होना
जिस को तुम रोज़ दिख ही जाते हो
उस की क़िस्मत है आइना होना
उस के होने की ये गवाही है
इन दरख़्तों का यूँ हरा होना
कितना मुश्किल है बचपना अब तो
कितना आसान था बड़ा होना
मैं तो हल हूँ किसी की मुश्किल का
मुझ को आया न मसअला होना
— Aisha Ayyub















