उम्र भर साएबान में रहना
तुम जहाँ हो अमान में रहना
याद का ये भी सिलसिला है बहुत
इक किरन का गुमान में रहना
जब कोई आरज़ू न रह जाए
दिल के ख़ाली मकान में रहना
नफ़रतें बारिशों की सूरत हैं
आग के दरमियान में रहना
सूरत-ए-सुर्ख़ी-ए-फ़साना-ए-गुल
तुम मिरी दास्तान में रहना
— Ahmad Azeem















